24 May 2005

क्षणिकाएँ-5

  • जल्लाद
डालकर फंदा गले में
रस्म,
दुश्मन सी निभाना
होती है, जल्लाद
आदमी नहीं,
नौकरी होती है !
***

  • बदलाव
दायरा
सुरक्षा का
क्या
इतना बढ़ जायेगा
सास को
अब,
बहू जलायेगी
कानून
बचा ले जायेगा !
***

  • दर्शन
फूटकर अंडा
कितना उजाला
कर जाता है,
बाँग देकर मुर्गा
आज भी
सूरज को
जगाता है !
***

-रमेश कुमार भद्रावले

22 May 2005