- लकीरें
रेखाओं का सिलसिला
आज तक
चला आ रहा है,
गरीबी रेखा से
गरीब,
बाहर ही नहीं आ रहा है !
***
- धरातल
आदमी के
आंकलन का पैमाना
आज,
यूँ चलता है,
बड़ा वो है
जो ज़मीन पर नहीं,
पर्दे पर चलता है !
***
- साधना
कड़ी मेहनत और
साधना में ढली
जेम्सवॉट की भाप को
बच्चों का खेल
मत बनाओ,
एक के पीछे एक आओ
रेल बनाओ, रेल बनाओ !
***
-रमेश कुमार भद्रावले
1 comment:
अगर आप अपनी कविताओं के साथ चित्र भी लगा दें तो इनका महत्व बढ़ जाएगा।
-मदन मोहन उपेन्द्र, संपादक सम्यक
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